नई दिल्ली।  अमेरिकन साइकलॉजिकल असोसिएशन के मुताबिक, अगर किसी बच्चे और उसके साथ दुष्कर्म करने वाले व्यक्ति के बीच 5 साल या इससे ज्यादा का अंतर होता है, तो इस स्थिति में दुष्कर्म करने वाले व्यक्ति को पीडोफाइल कहा जाता है। यह लोग बच्चों के साथ यौन शोषण के लिए अट्रैक्ट होते हैं। ऐसे व्यक्तियों में इसे मानसिक बीमारी के तौर पर भी परिभाषित किया जाता है। कई बार तो पीडोफाइल को बच्चों के साथ संपर्क की जरूरत ही नहीं पड़ती। वह इंटरनेट पर या अन्य जगह बच्चों के यौन शोषण की तस्वीरें देखकर ही खुश हो जाते हैं। पुरुष ही पीडोफाइल हो यह जरूरी नहीं है, महिलाएं भी पीडोफाइल होती हैं। हालांकि उनका आंकड़ा पुरुषों से काफी कम है। डॉक्टर्स के मुताबिक पहले माना जाता था कि महिलाएं पुरुषों के साथ इस काम में शामिल होती थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं है। अब महिलाएं भी बच्चों के साथ गंदे काम करती हैं। यह बात अलग है कि ऐसे मामले कम ही निकलकर सामने आते हैं। साइकायट्रिस्ट और साइकलॉजिस्ट्स के मुताबिक, अक्सर वे पीडोफाइल बनते हैं, जिनके साथ बचपन में किसी तरह का दुष्कर्म हुआ हो। किसी ने कोई गंदा काम किया हो। ऐसी घटनाओं के बाद अक्सर लोगों के दिल-दिमाग में वह चीजें बैठ जाती हैं, जिनका परिणाम यह होता है कि या तो वह व्यक्ति हमेशा डर में जीता है या फिर वह दूसरे बच्चों के साथ भी वैसा ही करने की कोशिश करता है। कुछ लोगों में यह जेनेटिक भी होता है। इसके अलावा हार्मोन्स का असामान्य होना और किसी तरह की दिमागी बीमारी भी पीडोफाइल बनने का कारण हो सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश के करीबन 25 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जो कभी न कभी इन पीडोफाइल का शिकार हो चुके हैं। यह पीडोफाइल पुरुष और महिलाएं दोनों थीं। जिनके साथ दुर्व्यवहार हुआ, उनमें भी लड़के-लड़कियां दोनों शामिल हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि बच्चों के साथ होने वाला अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। ऐसे में इसे कंट्रोल करने की जरूरत है, अन्यथा यह ग्राफ काफी बढ़ जाएगा, जिसे संभालना मुश्किल हो सकता है। मालूम हो कि रोजाना अखबारों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर आपके सामने ऐसी कई खबरें आती हैं, जिसमें बच्चों के साथ दुष्कर्म होने की बात कही जाती है। कई मामलों में तो हैवानियत के सारे स्तर टूट जाते हैं। जो लोग बच्चों के साथ गंदे काम करते हैं, ये छोटे लड़कियां-लड़कों दोनों को अपना शिकार बनाते हैं।