नई दिल्ली । टेलीकॉम सेक्टर की रेगुलेटरी बॉडी ट्राई हॉटस्टार, एयरटेल टीवी और सोनी लिव जैसी ओवर दी टॉप (ओटीटी) एप को टीवी चैनलों की तरह लाइसेंस फ्रेमवर्क के तहत लाने पर विचार कर रहा है। ट्राई ने हाल ही में टीवी चैनलों को सस्ता करने के लिए नया टैरिफ प्लान लागू किया था। ओटीटी पर टीवी चैनल्स को एप पर बिना किसी रेगुलेशन के दिखाया जाता है। सीनियर अधिकारी ने बताया, टीवी प्रोग्राम का लाइसेंस रजिस्टर्ड ब्रॉडकास्टर्स को दिया जाता है। फिर ये ब्रॉडकास्टर्स लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क के तहत कंटेंट को केबल ऑपरेटर्स को देते हैं। अगर कोई थर्ड पार्टी एप इसी चैनल को बिना कैरिज चार्ज और लाइसेंस फीस के दिखा रहा है, तब उसमें असमानता आती है।' उन्होंने कहा, या तो दोनों को लाइसेंस व्यवस्था के अंदर लाया जाना चाहिए या किसी को भी नहीं। इस मामले में ट्राई जुलाई-अगस्त तक एक कंसल्टेशन पेपर ला सकता है।
भारत में ब्रॉडकास्टिंग लाइसेंस 10 साल के लिए दिया जाता है। लाइसेंस लेने वाले को केबल टीवी (रेगुलेशन) एक्ट के तहत प्रोग्रामिंग और एडवर्टाइजिंग कोड का पालन करना होता है। चैनलों को सूचना और प्रसारण मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक काम करना पड़ता है। इसके उलट एप को आईटी एक्ट के तहत गवर्न किया जाता है, लेकिन इनका कोई लाइसेंस नहीं होता। ट्राई के इस कदम का विरोध एप के अलावा स्टार इंडिया, सोनी, जी और टाइम्स नेटवर्क जैसे ब्रॉडकास्टर्स भी कर सकते हैं जिनके अपने स्ट्रीमिंग एप हैं। वीडियो स्ट्रीमिंग सर्विस एमएक्स प्लेयर के सीईओ करण बेदी का कहना है, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स लोगों के लिए टीवी देखने का एक और जरिया है। टीवी चैनलों को पहले से रेगुलेट किया जा रहा है। किसी अतिरिक्त लाइसेंसिंग फ्रेमवर्क की कोई जरूरत नहीं है।' एमएक्स प्लेयर का स्वामित्व टाइम्स इंटरनेट के पास है, जो द टाइम्स ग्रुप का हिस्सा है और ईटी का प्रकाशन करता है।
अपने स्ट्रीमिंग एप चलाने वाले ब्रॉडकास्टर्स ने रेगुलेटर से पहले ही अलग कंसल्टेशन पेपर की अपील की थी। उनका कहना है कि एप को रेगुलेट नहीं किया जाना चाहिए। स्टार इंडिया ने अपने पेपर में कहा है, टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया एक्ट (1997) के तहत ट्राई के पास ओटीटी के इंटरनेट ईकोसिस्टम को रेगुलेट करने की अथॉरिटी नहीं है। इस इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (2000) के तहत गवर्न और रेगुलेट किया जाता है।' स्टार इंडिया ने यह भी कहा, इंटरनेट कंपनियां कॉम्पिटिशन एक्ट, कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी एक्ट आदि के अधीन हैं। यह लेजिस्लेटिव फ्रेमवर्क ओटीटी के लिए मार्केट में बिजनेस करने के कमर्शियल और टेकनिकल पैरामीटर्स और लीगल बाउंडरी तय करता है। डीटीएच कंपनियों और केबल ऑपरेटर्स ने ट्राई से टीवी और एप पर एक ही समय पर दिखाए जा रहे प्रोग्राम्स के खिलाफ कदम उठाने के लिए कहा है। उनका मानना है कि यह लाइसेंस के नियमों का उल्लंघन है।