नई दिल्ली । भारत में रेस्टोरेंट्स इंडस्ट्री का प्रतिनिधित्व करने वाली राष्ट्रीय संस्था ने 12 फीसदी जीएसटी रेट का एक और विकल्प मांगा है। संस्था मैकडॉनल्ड्स, डॉमिनोज और सबवे सहित तकरीबन 5 लाख रेस्टोरेंट्स की नुमाइंदगी करती है। उसका कहना है कि इंडस्ट्री को अभी इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम करने की इजाजत नहीं है, इसलिए उसे काफी परेशानी हो रही है। अभी रेस्टोरेंट्स पर 5 फीसदी का जीएसटी लगता है, जिसमें इनपुट क्रेडिट की इजाजत नहीं है। संस्था ने वित्त मंत्रालय को लिखे पत्र में कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में फूड सर्विसेज पर इनपुट टैक्स क्रेडिट की मनाही और 20 हजार आउटलेट बंद होने से सेक्टर पर बुरा असर पड़ा है। यह चिट्ठी रेवेन्यू सेक्रेटरी के नाम लिखी गई है। इसमें लिखा है कि फूड सर्विस प्रोवाइडर्स (एफएसपी) लागत 4 फीसदी तक घटाने के लिए आधा कच्चा माल गैर-पंजीकृत सप्लायर्स से खरीद रहे हैं। ये सप्लायर्स रजिस्टर्ड नहीं हैं, इसलिए वे टैक्स देने से बच जाते हैं। इसी कारण से वे कम दाम पर कच्चे माल की सप्लाई फूड सर्विस प्रोवाइडर्स को कर पाते हैं। नेशनल रेस्टोरेंट्स ऑफ इंडिया (एनएआरआई) के प्रेसिडेंट राहुल सिंह ने भी पिछले सप्ताह सरकार को चिट्ठी भेजने की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि आईटीसी की सुविधा न देकर रेस्टोरेंट्स को एक तरह से गैरकानूनी रास्ता पकड़ने के लिए उकसाया जा रहा है। हम चाहते हैं कि इंडस्ट्री में दो जीएसटी वाली व्यवस्था लागू की जाए। बिना इनपुट क्रेडिट के 5 फीसदी और इनपुट क्रेडिट के साथ 12 फीसदी जीएसटी रेट का विकल्प दिया जाए। लेटर में आगे लिखा है कि वित्त वर्ष 2018-19 में 20 हजार रेस्टोरेंट्स के बंद होने से सेक्टर की ग्रोथ में 2 फीसदी की गिरावट आई है। इससे इंडस्ट्री का विस्तार रुक गया है, जिससे निवेश में भी कमी आई है। लेटर में यह भी लिखा है, 'स्विगी, जोमैटो जैसे फूड एग्रीग्रेटर्स की सर्विस पर 18 फीसदी जीएसटी लगता है। इससे रेस्टोरेंट्स पर बोझ और बढ़ा है। लेटर में दावा किया गया है कि इनपुट टैक्स क्रेडिट नहीं मिलने की वजह से सरकार को सालाना 2,937 करोड़ रुपये के टैक्स रेवेन्यू से हाथ धोना पड़ रहा है।
पहले रेस्टोरेंट्स पर आईटीसी के साथ 18 फीसदी जीएसटी लगता था, जिसे नवंबर 2017 में घटाकर 5 फीसदी (बगैर आईटीसी) कर दिया गया था। इस कटौती का फायदा ग्राहकों को नहीं देने को लेकर डोमिनोज पिज्जा आउटलेट ऑपरेट करने वाली जुबिलेंट फूडवर्क्स और मैकडॉनल्ड्स जैसी कंपनियों पर नेशनल एंटी प्रॉफिटियरिंग अथॉरिटी (एनएए) ने जुर्माना लगाया है। लेटर के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में फूड सर्विस सेक्टर ने 4 लाख करोड़ का कारोबार किया था। ऑर्गनाइज्ड फूड सर्विस सेक्टर से पिछले वित्त वर्ष में सरकार को 14,865 करोड़ रुपये का जीएसटी कलेक्शन मिला, जबकि अनऑर्गनाइज्ड सेक्टर के उसके पास और 13,776 करोड़ रुपये की आमदनी की संभावना है। नेशनल रेस्टोरेंट्स ऑफ इंडिया के प्रेसिडेंट राहुल सिंह का कहना है कि आईटीसी की सुविधा न देकर रेस्टोरेंट्स को एक तरह से गैरकानूनी रास्ता पकड़ने के लिए उकसाया जा रहा है। हम चाहते हैं कि इंडस्ट्री में दो जीएसटी वाली व्यवस्था लागू की जाए। बिना इनपुट क्रेडिट के 5 फीसदी और इनपुट क्रेडिट के साथ 12 फीसदी जीएसटी रेट का विकल्प दिया जाए।