भोपाल । मध्यप्रदेश में मानसून के 50 दिन बीत चुक हैं। यहां हो रही बारिश से कई जगहों पर हालात बिगड़ गए हैं। हालांकि शनिवार को प्रदेश में पिछले दिनों के मुकाबले बेहद कम बारिश दर्ज की गई। लेकिन लबालब बह रही नदियों के कारण पानी रहवासी क्षेत्रों में घुस गया है। मंदसौर, विदिशा, रायसेन में हालात बदहाल हैं। मंदसौर में शिवना नदी का पानी पशुपतिनाथ मंदिर के गर्भगृह में पहुंच गया है। वहीं, रायसेन, विदिशा में बेतवा का कहर जारी है। नर्मदा नदी भी कई शहरों में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। चंबल नदी भी ऊफान पर है। 16 अगस्त तक प्रदेश में अब तक 19 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है। हालात यह हैं कि जबलपुर के बरगी भोपाल के कलियासोत, केरवा, कोलार, होशंगाबाद के तवा समेत प्रदेश के ज्यादातर डैम लबालब हो चुके हैं। गौरतलब है कि मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है।  इस हिसाब से अभी मानसून जाने में 45 दिन शेष हैं। इससे पहले प्रदेश में वर्ष  2016 में इतनी बारिश हुई थी। 
-दो दिन बात फिर बारिश
मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि 22 अगस्त तक मौसम हल्का साफ रहेगा। कुछ जगहों पर धूप भी निकल सकती है, लेकिन 22-23 अगस्त से फिर जोरदार बारिश होगी। हालांकि इस सिस्टम से मूसलाधार बारिश की संभावना नहीं है।
-नर्मदा, ताप्ती, बेतवा, सिंधु, पार्वती ऊफान पर
प्रदेश के करीब एक दर्जन बड़े बांधों के गेट खोले जाने के बाद प्रदेश की नदियों में पानी बढ़ गया है। श्योपुर जिले में बाढ़ के जलभराव के बीच शवयात्रा निकाली गई। श्योपुर में मालवा में पार्वती नदी में बाढ़ है। कोटा बैराज डैम से छोड़े जा रहे पानी के कारण चंबल नदी भी उफान पर है। इससे श्योपुर से सवाई-माधौपुर रूट पाली हाईवे भी बंद हो गया है।
कहां कितनी बारिश
अलीराजपुर    42 
सीहोर        21
रायसेन        20
भोपाल        16
छिंदवाड़ा        15
छतरपुर        15
जबलपुर        08
(मिमी में, 24 घंटे के दौरान)