सत्य का आधार माँ तू ,
ज्ञान का है सार माँ तू।

तू तो सबको तारिती है,
है सकल संसार माँ तू।

हर बुराई पर तू भारी,
कर्म का अभिसार माँ तू।

हम भले बेटे हों मूरख,
पर सदा है प्यार माँ तू।

हैवानियत जब भी है बढ़ती,
दानवों पर मार माँ तू।

राह में फूलों की रचना,
नित हटाती खार माँ तू।

जब भी हों अन्याय के पल,
तब करे संहार माँ तू।

नारियों का मान है नित,
दंभ पर धिक्कार माँ तू।

करुणा,ममता औ' दया का,
है वृहत् आगार माँ तू।

जिसने दी तुझको चुनौती,
उसकी तो है हार माँ तू।

वर्ष में दो बार आती,
बनके तो उपहार माँ तू।

हम सुतों पर नित्य करती,
भाव भर उपकार माँ तू।