साहेबगंज । देश के कई सरकारों ने करोड़ों अरबों रुपए खर्च करके भी जो काम नहीं कर पाई, वह काम लॉक डाउन ने कर दिखाया। केंद्र की वर्तमान भाजपा सरकार ने गंगा नदी को स्वच्छ और अविरल करने के लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत करोड़ों -अरबों रुपए खर्च कर दिए। गंगा के तटों को सौंदर्यीकृत किया गया। चूंकि झारखंड में एकमात्र साहेबगंज जिला है जहां से होकर गंगा बहती है. गंगा तटीय ग्रामीण तो गंगा को आस्था के प्रतीक मानते हुए अभी बताते हैं कि गंगा प्रारंभ से ही पवित्र रही है और आज भी पवित्र है। लेकिन गंगा नदी में इन दिनों डॉल्फिन का लगातार दिखना और पानी की सतह पर आकर डॉल्फिन का अठखेलियां खेलने का मनमोहक दृश्य लोगों का मन लुभा रहा है. 
 साहेबगंज गंगा सेवा समितिके अध्यक्ष प्रमोद पांडेय वर्तमान समय में स्वच्छ निर्मल गंगा को बहती देखकर प्रफुल्लित है और सरकार से मांग किया है कि इस क्षेत्र को डॉल्फिन सुरक्षित क्षेत्र घोषित किया जाए. जिससे विलुप्त होने के कगार पर पहुंची डॉल्फिन जैसे अन्य जलीय जीवों का संरक्षण हो सके।  
वहीं वन प्रमंडल पदाधिकारी विकास पालीवाल बताते हैं कि साहेबगंज में 83 किलोमीटर तक के क्षेत्र में गंगा नदी बहती है और लॉक डाउन का असर इन क्षेत्रों के गंगा नदी में देखने को मिल रहा है। गंगा नदी इन दिनों काफी साफ हुई है और इसका सबसे बड़ा प्रमाण डॉल्फिन का दिखना है। डॉल्फिन स्वभाव से ही साफ पानी में रहने वाला जलीय जीव है जो अपने को उस ओर लेकर चले जाते हैं जहां स्वच्छ पानी उन्हें मिलता है। हालांकि साहेबगंज के गंगा नदी में पाए जाने वाले डॉल्फिन के कारण अब साहेबगंज को भी डॉल्फिन जोन बनाने की तैयारी चल रही हैऔर सरकार की जैसे भी अनुमति प्राप्त होती है इस पर एक डिटेल्स सर्वे कराया जाएगा. 
साहेबगंज कॉलेज के जियोलॉजिस्ट बताते हैं कि गंगा नदी में जो स्वाभाविक गुण है जिसके कारण गंगा की एक विशिष्ट पहचान है। आज लॉक डाउन के कारण गंगा पुनः पूर्व रूप में आ गई है ।गंगा में विचरण करने वाले सभी प्रकार के जलीय जीवों को इन दिनों गंगा में हर प्रकार का तत्व प्राप्त हो रहा है। गंगा में पाई जाने वाली बैक्टीरियोफास में भी इजाफा हुआ है और गंगा काफी शुद्ध हुई है .