नई दिल्ली । विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन परीक्षण को रोकने और लैंसेट पत्रिका द्वारा इसे बेअसर करार देने की खबरों पर भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने कहा कि इस दवा का सेवन पूरी तरह सुरक्षित है।

आईसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव ने मंगलवार को प्रेसवार्ता में कहा कि कोरोना एक नया वायरस है, इसकी दवा अभी खोजी जा रही है। कई दवाओं पर काम चल रहा है लेकिन अभी तक सटीक दवा इजाद नहीं हो पाई है। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन पर आईसीएमआर औऱ एम्स समेत दिल्ली के तीन अस्पतालों ने अध्ययन किया था। अवलोकन अध्ययन के नतीजों में इस दवा का असर देखा गया। कुछ मामलों में साइड इफेक्ट्स देखे गए थे, लेकिन कोरोना के असर को कम करने में कारगर देखा गया। अभी इस पर और शोध चल रहा है।

महानिदेशक ने कहा कि हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा 100 साल से भी पुरानी मलेरिया की दवा है। इसके इस्तेमाल के लिए आईसीएमआर ने तीन दिन पहले ही संशोधित गाइड लाइंस जारी की है। इसके तहत स्वास्थ्य कर्मियों के साथ फ्रंट लाइन कर्मचारी, पुलिस, सफाईकर्मी भी इस दवा को सावधानी के तौर पर ले सकते हैं। इससे होने वाले साइड इफेक्ट्स इतने गंभीर नहीं हैं। इससे उल्टी, जी मचलाना, पेट दर्द जैसी शिकायतें देखी गई हैं। इस दवा का सेवन खाने के बाद करना चाहिए।

उन्होंने ने कहा कि इसके सेवन के दौरान इसीजी की जांच भी कराई जानी चाहिए। इसके साथ पीपीई किट्स के साथ बचाव के सभी उपाय भी करने चाहिए।