एक लकड़हारा अपनी पत्नी और नेत्रहीन मां के साथ एक जंगल के पास झोपड़ी बनाकर रहता था। उसकी कोई संतान नहीं थी और वह काफी गरीब भी था। हालांकि वो कभी भी किसी भी चीज के लिए भगवान से शिकायत नहीं करता था। वह लकड़ी काटकर और उन्हें बाजार में बेचकर अपना गुजारा किया करता था। रोज की तरह एक दिन वह लकड़ी काटकर बाजार की ओर जा रहा था। उसके पास काफी अधिक लकडियां थीं, इसलिए वह धीरे-धीरे चल रहा था। एक झाड़ी के पास से गुजरते हुए उसने घायल चिडिया को देखा।

उसको देखकर वह काफी दुखी हुआ और उसे हाथ में उठाकर देखने लगा कि वह जीवित है या नहीं। उसे यह देखकर काफी खुशी हुई कि चिडिया की सांस तो अभी भी चल रही थी। वो भागता हुआ तालाब के पास गया और चिडिया की चोंच में पानी की कुछ बूंदें डालीं।

लकड़हारे ने सोचा कि अगर उसने घायल चिडिया को वहीं छोड़ दिया, तो उसे कोई दूसरा जानवर खा जाएगा। इसलिए उसने उस चिडिया को घर ले जाने का फैसला किया। घर ले जाकर उसने उस चिडिया के बारे में मां और पत्नी को बताया। दोनों उसकी हालत देखकर काफी दुखी हुईं और उन्होंने उसके लिए घर का एक कोना चुना, जहां वह चिडिया आराम से सो गई। उस पूरी रात वह लकड़हारा बार-बार जागकर चिडिया की हालत देखता रहा और उसे पानी पिलाता रहा। सुबह होने से पहले ही उसने चिडिया की आवाज सुनी और खुश होकर उसने उस जगह को देखा, जहां उसे रखा था। लेकिन उस स्थान पर चिडिया तो थी ही नहीं।

उसने जल्दी से पूरी झोंपड़ी को छान मारा, पर चिडिया तो कहीं भी नहीं दिख रही थी। उसकी चहचहाने की आवाज सुनाई दे रही थी। वह घर से बाहर आ गया। अचानक उसने देखा कि उसके पैरों के पास चिडिया है और अचानक उसका आकार काफी तेजी से बढ़ रहा है। यह देखकर लकड़हारा डर गया, लेकिन तभी वह चिडिया एक परी बन गई।

यह देखकर हैरान लकड़हारा कुछ बोल पाता, उससे पहले ही परी बोली, ‘दोस्त, मेरा जीवन बचाने के लिए धन्यवाद। मुझे पता है कि तुम्हें अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हो पा रहा है। पर यह सच है कि मैं एक परी हूं और इस लोक में एक चिडिया के रूप में घूमती रहती हूं। कल
भी जब मैं उड़ रही थी तो अचानक एक बाज ने मुझ पर हमला कर दिया और मैं घायल हो गई। मैंने बचना चाहा, पर मैं नीचे गिर गई और तुमने मुझे आकर बचाया। इसलिए अब मैं तुम्हें कुछ तोहफा देना चाहती हूं। बताओ, तुम्हारी क्या इच्छा है?’

यह सुनकर लकड़हारा कुछ देर सोचता रहा और परी से बोला, ‘मुझे एक रात का समय सोचने के लिए दिया जाए।’
परी इस बात पर सहमत हो गई और लकड़हारा घर लौट आया। लौटकर उसने पत्नी और मां को सारी बात कह सुनाई। यह सुनकर उसकी मां बोली, ‘बेटा, परी से कहो कि मेरा अंधापन दूर कर दे।’

पत्नी बोली, ‘आप हमारे लिए बच्चों का वरदान मांग लीजिए।’ जबकि लकड़हारा यह चाहता था कि वो परी से मांग करके अपनी गरीबी को दूर कर दे।

अब तो एक के बजाय तीन इच्छाएं थीं, लेकिन परी तो इनमें से एक ही पूरी कर सकती थी।

पूरी रात लकड़हारा सोचता रहा कि वह आखिर क्या करे। सुबह हुई तो उसे एक विचार सूझा। वह भागकर जंगल में गया और उसे वहां परी खड़ी दिखी। जब परी ने उससे उसकी इच्छा के बारे में पूछा तो उसने कहा, ‘मेरी मां की इच्छा है कि वो अपने पोते-पोतियों को संपन्नता में खेलते हुए देखे।’

परी लकड़हारे की चतुराई देखकर काफी खुश हुई और उसने उसकी इच्छा को पूरा कर दिया।
कुछ समय बाद वह लकड़हारा सफल व्यवसायी बन गया, जो अपने आलीशान घर में अपनी पत्नी और बच्चों के साथ रहता था। उसकी मां अपने पोते-पोतियों को खेलते देखकर खुशी से फूली न समाती थी। तो इस तरह अपनी सोच के बल पर लकड़हारा अपनी तीनों इच्छाओं को पूरा कराने में कामयाब रहा।
 

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