कोरोना काल: भारी पड़ेगी भाजपा की ये लापरवाही
दिल्ली में मरकज़ और मप्र में भाजपाई फैला रहे हैं कोरोना...?
       न काहू से बैर/राघवेंद्र सिंह
भोपालमोहब्बत और जंग जो कराये सो कम है। वैसे भी कहा जाता है कि इसमें सब कुछ जायज़ है। नए जमाने में मजहब और सियासत को भी इसमें जोड़ा जाए तो यह काबिले ऐतराज़ के बजाय काबिल-ए-क़ुबूल ज्यादा मुफीद रहेगा। कोविड-19 याने कोरोना काल मे पूरी दुनिया लॉक डाउन में है। इस जानलेवा दौर में धर्म और राजनीति करने वाले दो गज की दूरी बनाने के बजाय भीड़ लगाने और बिना मास्क लगाए लोगो से मिल रहे है। यह तब है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सार्वजनिक कार्यक्रम नही करने का आव्हान किया है। मोदी की यह मंशा मध्य प्रदेश में ही सबसे ज़्यादा खारिज की जा रही है। दिल्ली में तब्लीगी मरकज पर कोरोना फैलाने के जो आरोप लगे थे लगता है उससे मिलता जुलता काम चुनाव जीतने के लिए भाजपा नेता भी कर रहे हैं।
जब से कोरोना आया है हम मध्यप्रदेश का ज़िक्र करे तो भोपाल-इंदौर के साथ अब सागर क्षेत्र में भी भाजपा जैसी पार्टी भीड़ भरे जलसे कर रही है।हाल ही कि बात करे तो एक केंद्रीय मंत्री के जन्मदिन पर इंदौर में उनके समर्थक नेता जी ने हजारों लोगों को इकट्ठा कर राशन बांटने का काम किया। इधर कांग्रेस के नेताओ ने प्रदर्शन कर भीड़ इकट्ठा कर ली थी। उन्हें हटाने के लिए कुछ अधिकारी नेताओ पर एक्शन लेने के बजाय उन्हें  मनाने घुटने के बल बैठे।हालांकि बाद में ऐसे कमजोर अफसरों को ही हटा दिया गया। सबको पता है कि कोरोना संक्रमण के मामले में इंदौर देश के हॉटस्पॉट में शामिल है। यहां कलेक्टर मनीष सिंह और उनकी टीम कोरोना को काबू में करने के लिए दिन-रात जुटी हुई है। इसपर सियासी गैरजिम्मेदारी जनता और प्रशासन की मेहनत पर पोछा लगा देती है।
 बेशक मध्यप्रदेश में 24 विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव होने है। इनके नतीजो पर भाजपा की शिवराज सरकार और कई नेताओं के भविष्य का फैसला होना है। इसलिए नेता और दल हड़बड़ी और जल्दबाज़ी में है। वे अपने स्वार्थ में इतने अंधे हो गए है कि कोरोना जैसी महामारी को रोकने के लिए तैयार गाइड लाइन को तोड़ने में भी नही हिचक रहे है। इस लालच के चलते उन्हें पता ही नही है के वे जाने अनजाने प्रधानमंत्री मोदी के आग्रह और आदेश की अवलेहना कर जनता को मौत के मुंह मे फंसा रहे हैं। प्रदेश भाजपा कार्यालय में भी चुनावी तैयारी के लिए भीड़ भरे आयोजन करने का सिलसिला जारी है। चिंताजनक बात यह है कि इस तरह की दिशा निर्देश तोड़ने वाली सियासी गतिविधियां भाजपा हाईकमान भी नही रोक पा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोगों से मिलने, दौरे - सभाएं करने में कोई मुकाबला नही हैं। सबको पता है ये काम वे बिना खाए पिए दिनरात बड़े मजे से कर सकते हैं। लेकिन वे भी दिल्ली के निर्देश के पालन में इक्कादुक्का अवसर को छोड़ दौरे करने से बच रहे हैं। भोपाल में  प्रदेश भाजपा के साथ इंदौर और अब मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के सुरखी इलाके से आये सैकड़ो समर्थक भाजपा में शामिल हुए। भीड़ भरे आयोजनों का यह पहला वाक़्या नही है। इंदौर,रायसेन,मुंगावली के बाद सागर का सुरखी भी इस कतार में आ गया है।
कांग्रेस अभी आराम में है...
पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ जो कि प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष भी है उपचुनाव की तैयारी में ज्यादा लोड नही ले रहे है। भाजपा की तुलना में कमलनाथ सक्रियता के लिहाज़ से पिछड़े हुए है। आम चुनाव की भांति दिग्विजय सिंह कांग्रेस को जिताने के जोड़-तोड़ में लगे है। कांग्रेस तो वैसे भी चुनाव में ऐनवक्त पर काम करने की रणनीति को अपनाती आई है। इसलिए कोरोना की पाबंदियां उसे मुफीद लगती हैं। कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अलबत्ता चुनावी इलाकों के नेताओं - कार्यकर्ताओं के साथ सामाजिक संगठनों के सम्पर्क में हैं। प्रत्याशी चयन से लेकर रणनीति बनाने में उनकी सक्रियता और सम्पर्क महत्वपूर्ण रोल अदा करेंगे। ग्वालियर-चम्बल की विधानसभा सीटों पर असर डालने के लिए कांग्रेस का एक खेमा पूर्व चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी की वापसी और फिर उनकी उम्मीदवारी को लेकर दबाव बनाए हुए है। लेकिन विधानसभा में अविश्वास प्रस्ताव के दिन कांग्रेस के उपनेता रहे चौधरी राकेश सिंह का पार्टी का पल्ला छोड़ भाजपा का दामन थामना वापसी में सबसे ज्यादा आड़े आ रहा है। दिग्विजय सिंह उनके कांग्रेस में लौटने का खुलकर ऐतराज कर रहे है। राकेश सिंह ने दिग्विजय के विरोध को ही यह कहते हुए चुनौती दी है कि वे किस अधिकार से उनका प्रवेश रोक रहे है। यह विवाद उपचुनाव तक और गरमाएगा।

टिड्डी दल भोपाल में ...

भोपाल के आसमान टिड्डी दल को देखकर लोगो में आश्चर्य और दहशत का माहौल था। रविवार की शाम राजधानी के आसमान में टिड्डियों का दल देखा गया। लोगो ने गाड़ियों के हॉर्न और थालिया बजाकर उन्हें भगाया। ये टिड्डी दल अब होशंगाबाद की तरफ रवाना हो गए है। मध्यप्रदेश में टिड्डियों ने हमला कर मूंग की फसल को बड़े पैमाने पर नुकसान पहुचाया है। मंदसौर,नीमच से लेकर मालवा और निमाड़ अंचल में आतंक मचा चुके है। किसान नेता केदार सिरोही और राम इनानिया ने किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। उपचुनाव में यह भी एक बड़ा मुद्दा बनने के आसार हैं। ये टिड्डी दल तो चले गए मगर सियासत और अफसरशाही में जो टिड्डी गिरोह हैं वे तो जमे हुए हैं और शायद जमे ही रहेंगे पीढ़ी दर पीढ़ी...