लोकसभा में बुधवार देर रात तक चली चर्चा के बाद रात 2 बजे वक्फ बिल पास कर दिया गया। बिल पर तय 8 घंटे से 4 घंटे ज्यादा बहस हुई। आज इस बिल को राज्यसभा में दोपहर 1 बजे पेश किया जाएगा। राज्यसभा में चर्चा का समय 8 घंटे तय किया गया है। हालांकि विपक्ष की मांग पर चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है। इस बीच वक्फ की संपत्ति को लेकर देश में बहस छिड़ी हुई है। ऐसे में आइये जानते हैं देश में वक्फ संपत्ति की शुरुआत कब से हुई।

ऐसे हुई वक्फ संपत्ति की शुरुआत
भारत में वक्फ संपत्ति का इतिहास 12वीं सदी के अंत में दो गांवों से शुरू हुई। अब यह बढ़कर 39 लाख एकड़ तक पहुंच गई है। भारत में वक्फ बोर्डों के तहत भूमि पिछले 12 सालों में दोगुनी हो गई है। वक्फ भूमि पर आंकड़ों का खुलासा गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को लोकसभा में चर्चा के दौरान किया। शाह ने कहा कि 1913 से 2013 तक वक्फ बोर्ड के पास कुल 18 लाख एकड़ जमीन थी। 2013 से 2025 के बीच इसमें 21 लाख एकड़ जमीन और जुड़ गई है। गृहमंत्री ने कहा कि 39 लाख एकड़ में से 21 लाख एकड़ जमीन 2013 के बाद जोड़ी गई है। ये लोग कह रहे हैं कि इसका दुरुपयोग नहीं हुआ है।

वक्फ 8.72 लाख संपत्तियों का मालिक
गृहमंत्री ने बताया कि पहले के सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में वक्फ बोर्ड 9.4 लाख एकड़ क्षेत्र के 8.72 लाख संपत्तियों का स्वामित्व रखता है। बता दें कि वक्फ का तात्पर्य उन संपंत्तियों से है जो इस्लामी कानून के तहत धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए दान की गई है। संपत्ति से प्राप्त आय समुदाय के उपयोग के लिए होती है ऐसी संपत्तियों को बेचा नहीं जा सकता।

20 हजार संपत्तियां बेची गईं
बता दें कि पूरे भारत में फिलहाल 30 वक्फ बोर्ड हैं। गृहमंत्री ने वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता की कमी और कुछ लोगों द्वारा उनके दुरुपयोग के बारे में बताया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड को पट्टे पर दी गई संपत्तियां 20 हजार थीं लेकिन 2025 रिकाॅर्ड के अनुसार ये संपत्तियां शून्य हो जाएंगी। ये संपत्तियां कहां गईं? किसकी अनुमति से इसे बेचा गया। भारत में वक्फ भूमि के दावे को लेकर काफी बहस और विवाद रहा है। वक्फ ने हाल ही में तमिलनाडु में 1500 साल पुराने चोल मंदिर और केरल के एक गांव जिसमें 600 से अधिक ईसाई परिवार रहते हैं जमीन पर दावा किया है। इसके अलावा कर्नाटक की एक 5 सितारा होटल पर भी ये दावा किया गया है।