क्या कलावा पहनने की भी होती है सीमा? जानिए ज्यादा समय तक पहनने के नुकसान, क्यों समय पर उतारना होता है जरूरी?
हिन्दू धर्म में कलावा यानी रक्षा सूत्र का खास महत्व है. पूजा पाठ के बाद जब पंडित हमारे हाथ में यह रंग बिरंगा धागा बांधते हैं, तो हम इसे शुभ मानकर लंबे समय तक हाथ में बांधे रखते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस धागे को कब तक पहनना चाहिए? क्या इसे महीनों तक हाथ में रखना सही है? अगर नहीं, तो क्यों? दरअसल, कलावा सिर्फ एक धागा नहीं होता. इसमें बहुत सारी ऊर्जा जुड़ी होती है. इसे बांधते समय मंत्र पढ़े जाते हैं और आस्था के साथ इसे हाथ में बांधा जाता है. यही वजह है कि इसे सही तरीके से पहनना और सही समय पर उतारना बहुत ज़रूरी माना गया है.
कलावा को क्यों माना जाता है खास
कलावा को भगवान विष्णु, शिव और ब्रह्मा से जोड़ा गया है. साथ ही इसमें मां लक्ष्मी, पार्वती और सरस्वती का भी वास माना जाता है. जब यह धागा हाथ में बांधा जाता है, तो माना जाता है कि यह व्यक्ति को बुरी नज़र से, बीमारी से और नकारात्मक सोच से बचाता है. लेकिन समय बीतने के साथ इस धागे का असर कम होने लगता है.
कब तक पहनना चाहिए कलावा?
ज्योतिष के जानकारों के अनुसार, कलावा को सिर्फ 21 दिन तक ही पहनना चाहिए. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि 21 दिन के बाद अक्सर इसका रंग उड़ने लगता है या धागे टूटने लगते हैं. जब कलावा कमजोर हो जाए या उसका रंग उतर जाए, तो उसका असर भी खत्म होने लगता है. ऐसे में इसे पहनना अशुभ माना जाता है.
पुराना कलावा क्या कर दें?
अगर आप 21 दिन के बाद कलावा उतार रहे हैं, तो उसे कहीं भी न फेंकें. न ही उसे मंदिर में रखें या किसी पेड़ पर लटकाएं. माना जाता है कि पुराना कलावा नकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है. इसलिए सबसे अच्छा तरीका है कि आप उसे मिट्टी में दबा दें. इससे उस धागे के साथ जुड़ी नकारात्मक ऊर्जा भी धरती में समा जाती है.
क्या होता है अगर पुराना कलावा न हटाएं?
अगर कोई व्यक्ति बहुत समय तक एक ही कलावा पहनता है, तो उसे इसका उल्टा असर देखने को मिल सकता है. शास्त्रों के अनुसार, ऐसा करने से ग्रहों का संतुलन बिगड़ सकता है और जीवन में रुकावटें आने लगती हैं. कई बार बिना वजह तनाव, बीमारी और घर में अशांति का कारण भी यही हो सकता है.

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