भारत की जल कूटनीति का असर, चीन ने पाकिस्तान के लिए तेज किया बांध निर्माण
भारत की ओर से पहलगाम हमले के बाद पाकिस्तान जो जख्म दिए गए हैं, उनके बाद वह भविष्य के बारे में सोचने के लिए मजबूर हो गया है. भारत से मार खाने के बाद पाकिस्तान चीन और तुर्किये की गोद में बैठ गया है, लेकिन उसको मालूम है कि अगली कोई हिमाकत उसको वहां भी नहीं बचा पाएगी. इसलिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर वह ‘फ्यूचर प्लानिंग’ में लगा हुआ है.
पाकिस्तान को बचाने के लिए चीन ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है, चीन ने कहा है कि वह भारत की ओर से हाल ही में जल आपूर्ति बंद करने की धमकी के मद्देनजर पाकिस्तान में एक प्रमुख बांध के निर्माण कार्य में तेजी ला रहा है. चीन की सरकारी कंपनी चाइना एनर्जी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन 2019 से उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में मोहमंद जलविद्युत परियोजना पर काम कर रही है, जिसके अगले साल तक पूरा होना है, लेकिन भारत के खतरे को देखते अब इसका काम और तेजी से पूरा होना शुरू हो गया है.
भारत से घबराए चीन और पाकिस्तान
चीन का यह बयान भारत के उस ऐलान को देखते हुए आया है, जिसमें भारत ने 22 अप्रैल को पहलगाम में हमले के जवाब में 1960 की सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था. भारत के इस कदम से पाकिस्तान को जल सुरक्षा संबंधी खतरों का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि पड़ोसी देश कथित तौर पर अपनी लगभग 80 फीसद कृषि के लिए सिंधु नदी के पानी पर निर्भर है.
भारत के कदम से बौखला गया था पाकिस्तान
सिंधु जल संधि के निलंबन के बाद इस्लामाबाद ने कहा था कि वह पाकिस्तान के पानी को रोकने या मोड़ने की किसी भी कोशिश को ‘युद्ध की कार्रवाई’ मानेगा और वह राष्ट्रीय शक्ति के पूरे स्पेक्ट्रम में पूरी ताकत के साथ जवाब देगा.
पाक सरकार ने अपने बयान में कहा, “पानी पाकिस्तान का महत्वपूर्ण राष्ट्रीय हित है, यह 240 मिलियन लोगों की जीवन रेखा है और इसकी उपलब्धता को हर कीमत पर सुरक्षित रखा जाएगा.”

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