मल्लिकार्जुन खरगे ने कुलगाम हमले पर जताया दुख, आतंकियों के तरीके को लेकर किया बड़ा दावा
श्रीनगर| कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में छत्तीसगढ़ के दो निर्दोष मजदूरों की आतंकवादियों द्वारा की गई कायराना हत्या की कड़े शब्दों में निंदा की है। उन्होंने तीखा आरोप लगाते हुए कहा कि आतंकियों ने पहले दोनों मजदूरों की पहचान की और उसके बाद सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें अपना निशाना बनाया।
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए लिखा कि, "जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुआ यह कायराना आतंकी हमला अत्यंत निंदनीय और पूरी मानवता को शर्मसार करने वाला है। दो बेकसूर मजदूरों से उनकी पहचान पूछकर उनकी निर्मम हत्या करना आतंक की सबसे क्रूर और घिनौनी मानसिकता का जीवंत उदाहरण है। इसकी जितनी भी भर्त्सना की जाए, वह कम है। मेरी गहरी संवेदनाएं शोक संतप्त परिवारों के साथ हैं। इस जघन्य अपराध के दोषियों के विरुद्ध तुरंत त्वरित और कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए और उन्हें कानून के दायरे में रहकर सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।"
'आतंकवाद के खिलाफ पूरा देश हमेशा एकजुट है' — राहुल गांधी
संसद में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस कायराना हमले पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि, "जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में हुए इस दुस्साहसी आतंकी हमले में हमारे देश के दो गरीब श्रमिकों की हत्या होना बेहद दुखद और पीड़ादायक है। मैं शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। इस घिनौने कृत्य को अंजाम देने वाले आतंकियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए और उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। आतंकवाद के खिलाफ पूरा देश आज भी पूरी तरह से एकजुट है।"
कांग्रेस की वरिष्ठ सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी अपनी पोस्ट में लिखा कि कुलगाम में ईंट-भट्ठे पर मजदूरी करने वाले दो मजदूरों की पहचान पूछकर उनकी हत्या किया जाना बेहद घृणित और मानवता विरोधी कृत्य है। पूरे देश की संवेदनाएं पीड़ित परिवारों के साथ हैं और इस मामले में बिना किसी देरी के त्वरित कार्रवाई कर आतंकियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने की कड़ी निंदा, 10-10 लाख मुआवजे का ऐलान
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कुलगाम के केलम इलाके में दो बाहरी मजदूरों की इस बर्बर हत्या की कड़ी निंदा की है। इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि, "हम पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं और ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि वे इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें। कमजोर और बेकसूर लोगों को निशाना बनाना एक पूर्णतः अमानवीय कृत्य है।"
मुख्यमंत्री ने मारे गए दोनों मजदूरों के परिजनों को 'मुख्यमंत्री राहत कोष' से 10-10 लाख रुपये की आर्थिक मुआवजा राशि देने की औपचारिक घोषणा की है। यह सहायता राशि जिला प्रशासन की ओर से दी जाने वाली 6-6 लाख रुपये की तत्काल वित्तीय सहायता के अतिरिक्त होगी। मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवारों को पूरा भरोसा दिलाया कि संकट की इस घड़ी में सरकार उनके साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ी है।
क्या है पूरा मामला?
कुलगाम जिले के केलम गांव में शुक्रवार को हुए एक कायराना आतंकवादी हमले में गोली लगने से दो मजदूरों की मौत हो गई है। अधिकारियों ने विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के रहने वाले एक अन्य घायल मजदूर ने शनिवार सुबह श्रीनगर के एक बड़े अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। मृतकों की पहचान दीपक रैट्रे (24 वर्ष) और बोपिंदर (28 वर्ष) के रूप में हुई है। ये दोनों मूल रूप से छत्तीसगढ़ के निवासी थे और कुलगाम के केलम गांव में एक स्थानीय ईंट भट्ठे पर रहकर मजदूरी का काम करते थे।
अधिकारियों के अनुसार, गंभीर रूप से घायल बोपिंदर को शुक्रवार देर शाम अनंतनाग शहर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से रेफर करके श्रीनगर के सौरा स्थित सुपर स्पेशलिटी 'शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज' (SKIMS) में भर्ती कराया गया था, जहाँ शनिवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। शुक्रवार शाम आतंकवादियों ने केलम गांव में इन दोनों बाहरी मजदूरों को बहुत करीब से गोली मारकर गंभीर रूप से घायल कर दिया था।
घटना के तुरंत बाद दोनों घायलों को अनंतनाग के अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ दीपक ने गंभीर चोटों के कारण दम तोड़ दिया था, जबकि बोपिंदर को बेहतर इलाज के लिए एसकेआईएमएस रेफर किया गया था, जहाँ शनिवार सुबह उसने भी जीवन की अंतिम सांस ली।
सुरक्षा बलों ने चलाया तलाशी अभियान
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा सहित देश और प्रदेश के तमाम राजनीतिक व धार्मिक नेताओं ने इस कायराना आतंकवादी हमले की कड़ी निंदा की है। घटना के तुरंत बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की सघन घेराबंदी कर दी है और हमलावरों की तलाश के लिए बड़े पैमाने पर कॉम्बिंग व तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ऐसे समय में सामने आई है जब कश्मीर घाटी में आतंकवाद-रोधी अभियानों को काफी तेज किया गया है। इससे पहले 22 जुलाई को भी आतंकवादियों ने अनंतनाग शहर में यात्रा ड्यूटी पर तैनात जम्मू-कश्मीर आर्म्ड पुलिस के हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की गोली मारकर हत्या कर दी थी।

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