भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांता पांडे ने कहा है कि एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का उदय भारत के शेयर बाजारों के कामकाज में बड़ा बदलाव ला सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि नियामक के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना होगी कि तकनीक के व्यापक इस्तेमाल के बीच जवाबदेही कमजोर न पड़े। 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026' में बोलते हुए उन्होंने यह बात रखी।

तकनीक आउटसोर्स हो सकती है, जवाबदेही नहीं

सेबी अध्यक्ष ने कहा कि वित्तीय संस्थान व्यापार, अनुपालन, निगरानी और जोखिम प्रबंधन के लिए एआई प्रणालियों को तेजी से अपना रहे हैं। ऐसे में उन्होंने जोर देकर कहा, "प्रौद्योगिकी को आउटसोर्स किया जा सकता है, लेकिन नियामक द्वारा जवाबदेही को आउटसोर्स नहीं किया जा सकता।" उन्होंने स्पष्ट किया कि बाहरी प्रदाताओं द्वारा समाधान विकसित करने के बावजूद परिणामों की जिम्मेदारी नियामक और संस्थानों की ही रहेगी। इसके लिए पारंपरिक नियामक ढांचों से हटकर स्वचालित निर्णयों और एआई मॉडलों के अनुकूल नियम बनाने होंगे।

कॉर्पोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन पर पायलट प्रोजेक्ट

प्रतिभूति बाजार की दक्षता बढ़ाने के लिए सेबी ने कॉर्पोरेट बॉन्ड के टोकनाइजेशन पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस तकनीक के जरिए वित्तीय परिसंपत्तियों को डिजिटल रूप से प्रदर्शित किया जा सकेगा, जिससे निपटान, स्वामित्व रिकॉर्ड और बाजार अवसंरचना के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। नियामक व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले इसके लाभ और जोखिमों का आकलन कर रहा है।

क्वांटम कंप्यूटिंग: साइबर सुरक्षा के लिए नया खतरा

एआई के अवसरों के साथ-साथ सेबी अध्यक्ष ने तकनीकी जोखिमों पर भी सचेत किया। उन्होंने बताया कि सेबी के साइबर सुरक्षा ढांचे में 'क्वांटम कंप्यूटिंग' को एक संभावित खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है। डर यह है कि क्वांटम तकनीक में प्रगति से मौजूदा क्रिप्टोग्राफिक सुरक्षा प्रणालियां कमजोर हो सकती हैं, जिससे वित्तीय अवसंरचना पर साइबर हमलों का खतरा बढ़ सकता है।

निवेशकों की सुरक्षा और बाजार में विश्वास पर जोर

तुहिन कांता पांडे ने कहा कि डिजिटल रूप से परस्पर जुड़े भारतीय शेयर बाजारों में किसी भी तकनीकी विफलता या साइबर सेंध का असर सिर्फ एक संस्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे बाजार की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सेबी एआई के सुरक्षित कार्यान्वयन के लिए दिशानिर्देशों पर काम कर रहा है, ताकि बाजार की सुरक्षा और अखंडता बनी रहे।