देश के विभिन्न हिस्सों सहित राजधानी नई दिल्ली में लगातार बढ़ रहे पारे और अत्यधिक पसीने के कारण लोगों के शरीर से पानी और जरूरी लवण (मिनरल्स) तेजी से कम हो रहे हैं। यदि वक्त रहते इस कमी को पूरा न किया जाए, तो व्यक्ति गंभीर रूप से डिहाइड्रेशन (जल की कमी) का शिकार हो सकता है। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि अक्सर लोग पानी की कमी के शुरुआती संकेतों को मामूली सुस्ती या थकान मानकर टाल देते हैं, जो आगे चलकर स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। डिहाइड्रेशन का विपरीत असर न सिर्फ मांसपेशियों पर पड़ता है, बल्कि यह हमारे दिमाग, दिल और किडनी जैसे नाजुक अंगों की कार्यप्रणाली को भी प्रभावित कर सकता है। इसलिए शरीर द्वारा दिए जाने वाले इन सिग्नलों को पहचानना बेहद आवश्यक है।

आइए जानते हैं कि शरीर में जल का स्तर घटने पर कौन से मुख्य लक्षण उभरते हैं और इस संकट से बचने के लिए क्या एहतियात बरतनी चाहिए:

डिहाइड्रेशन को दर्शाने वाले 8 प्रमुख लक्षण

  1. गले का बार-बार सूखना और प्यास लगना: यदि पानी पीने के कुछ देर बाद ही आपको दोबारा तेज प्यास महसूस होने लगती है, तो समझ लें कि यह शरीर के भीतर पानी का स्तर घटने का सबसे पहला और स्पष्ट संकेत है।

  2. होंठों और मुंह का शुष्क होना: पानी कम होने पर लार का निर्माण धीमा हो जाता है, जिससे मुंह के भीतर सूखापन बढ़ जाता है, होंठ फटने लगते हैं और निगलने में तकलीफ हो सकती है।

  3. यूरिन के रंग में बदलाव: सामान्य तौर पर यूरिन का रंग साफ या हल्का पीला होता है। मगर यदि इसका रंग गहरा पीला, मटमैला या कत्थई जैसा दिखने लगे, तो यह इस बात का सबूत है कि शरीर में पानी की भारी किल्लत है।

  4. सिर में भारीपन और चक्कर आना: मस्तिष्क के ऊतकों को सुचारू रूप से काम करने के लिए पर्याप्त लिक्विड की जरूरत होती है। इसकी कमी होने पर सिरदर्द, माइग्रेन का ट्रिगर होना, चक्कर आना और मानसिक एकाग्रता में कमी आने लगती है।

  5. असामान्य कमजोरी और सुस्ती: लिक्विड का स्तर गिरने से ब्लड प्रेशर प्रभावित होता है, जिससे शरीर की एनर्जी का स्तर एकदम नीचे चला जाता है। व्यक्ति बिना कोई भारी काम किए भी थका-थका महसूस करता है।

  6. त्वचा का बेजान होना: पानी की कमी के कारण त्वचा अपनी नमी और लचीलापन खो देती है। स्किन रूखी, खुरदरी और बेजान नजर आने लगती है।

  7. हार्ट रेट का अचानक बढ़ना: शरीर में तरल पदार्थ (फ्लूइड) कम होने से खून गाढ़ा होने लगता है, जिससे दिल को ब्लड पंप करने के लिए सामान्य से दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। इस वजह से दिल की धड़कनें असामान्य रूप से तेज हो जाती हैं।

  8. पसीना आना बंद हो जाना: अत्यधिक तपन और उमस भरे माहौल में भी अगर आपके शरीर से पसीना नहीं निकल रहा है, तो यह 'मेडिकल इमरजेंसी' यानी गंभीर डिहाइड्रेशन की स्थिति हो सकती है।

बचाव के अचूक और सरल उपाय

  • लगातार पानी पीते रहें: प्यास लगने का इंतजार न करें; थोड़े-थोड़े अंतराल पर दिनभर में कम से कम 3 से 4 लीटर साफ पानी जरूर पिएं।

  • नेचुरल ड्रिंक्स को शामिल करें: सादे पानी के अलावा डाइट में नींबू पानी, ताजा नारियल पानी, पुदीने का रस, छाछ और पानी से भरपूर मौसमी फल जैसे तरबूज, खरबूजा और खीरा शामिल करें।

  • हाइड्रेशन किट रखें साथ: जब भी किसी जरूरी काम से धूप या बाहर निकलें, तो अपने बैग में पानी या ओआरएस (ORS) के घोल की बोतल जरूर रखें।

  • कैफीन और अल्कोहल से दूरी: अत्यधिक चाय, कॉफी, कोल्ड ड्रिंक्स और शराब का सेवन कम करें, क्योंकि ये चीजें शरीर से पानी को सोखती हैं और डिहाइड्रेशन को बढ़ावा देती हैं।

  • खाली पेट बाहर न जाएं: भीषण गर्मी के मौसम में लंबे समय तक भूखे रहने से बचें। घर से निकलते समय कुछ हल्का और सुपाच्य भोजन अवश्य करके निकलें।