घर के मंदिर में गलती से भी न करें ये भूलें
भारत में अधिकांश घरों में देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा और भक्ति व्यक्त करने के लिए एक पवित्र स्थान, जिसे आमतौर पर घर का मंदिर या पूजा घर कहा जाता है, अवश्य होता है। इस स्थान पर नियमित पूजन से न केवल सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, बल्कि महालक्ष्मी सहित सभी दैवीय शक्तियों की कृपा भी बनी रहती है। वातावरण पवित्र बना रहता है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। हालांकि, कई बार जानकारी के अभाव में हम कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जो शुभ फल देने के बजाय अशुभ प्रभाव डाल सकती हैं। इन छोटी-छोटी त्रुटियों से बचने के लिए घर के मंदिर में कुछ विशेष बातों का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है।
शास्त्रों और मान्यताओं के अनुसार, पूजा स्थल में कुछ विशेष नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। सबसे पहले, गणेश जी की प्रतिमाओं को लेकर एक महत्वपूर्ण बात है। यद्यपि हम सभी प्रथम पूज्य गणेश जी की मूर्तियों को अपने मंदिर में स्थान देते हैं, लेकिन यह ध्यान रखना चाहिए कि मंदिर में कभी भी गणेश जी की तीन प्रतिमाएं नहीं होनी चाहिए। ऐसा माना जाता है कि तीन गणेश प्रतिमाएं शुभ नहीं होती हैं, अतः एक या अधिकतम दो प्रतिमाएं ही रखना उचित है। इसी तरह, शंख भी पूजन का एक अभिन्न अंग है, जो अपनी पवित्र ध्वनि से वातावरण को शुद्ध करता है और सकारात्मकता फैलाता है। लेकिन घर के मंदिर में दो शंख रखने से बचना चाहिए। यदि आपके मंदिर में गलती से दो शंख हैं, तो उनमें से एक को हटा देना ही उचित माना जाता है ताकि नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सके।
मूर्तियों के आकार को लेकर भी कुछ नियम प्रचलित हैं। घर के मंदिर में बहुत बड़ी मूर्तियां नहीं रखनी चाहिए। बड़ी मूर्तियों की देखभाल और विधि-विधान से पूजा करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है और शास्त्रों में इसकी अनुशंसा नहीं की गई है। विशेष रूप से, यदि आप घर में शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं, तो उसका आकार आपके अंगूठे से बड़ा नहीं होना चाहिए। शिवलिंग को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है और इसी वजह से घर के मंदिर में एक छोटा और उपयुक्त आकार का शिवलिंग रखना ही अधिक शुभ फलदायी होता है। यह घर के वातावरण में शांति और सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक होता है और महादेव की कृपा बनी रहती है। पूजा-पाठ से संबंधित एक और महत्वपूर्ण नियम खंडित मूर्तियों से जुड़ा है। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से खंडित मूर्तियों की पूजा वर्जित बताई गई है। यदि कोई मूर्ति किसी कारणवश खंडित हो जाती है या उसमें दरार पड़ जाती है, तो उसे तत्काल पूजा स्थल से हटा देना चाहिए। ऐसी मूर्तियों को किसी पवित्र बहती नदी में विधिपूर्वक प्रवाहित कर देना शुभ माना जाता है। खंडित मूर्तियों की पूजा करने से नकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सकता है और इसके अशुभ परिणाम भी भुगतने पड़ सकते हैं, जिससे घर में क्लेश और परेशानियों का आगमन हो सकता है।

राशिफल 24 जुलाई 2026: जानिए आज का दिन आपके लिए कैसा रहेगा
भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना बनी आर्थिक संबल
बाल श्रम पर जीरो टॉलरेंस, हर मुक्त बच्चे के पुनर्वास पर होगा विशेष फोकस
महिला एशियन चैंपियनशिप की तैयारियों को लेकर मंत्री सारंग नाथुबरखेड़ा अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स का किया निरीक्षण
समान नागरिक संहिता को व्यापक जनसमर्थन
माँ चन्द्रहासिनी आरोग्य धाम बनेगा जनसेवा का नया केंद्र : वित्त मंत्री ओपी चौधरी
धमतरी जिले में 200 एकड़ से बढ़ाकर 600 एकड़ तक औषधीय खेती के विस्तार का लक्ष्य
मध्यप्रदेश पुलिस की साइबर अपराधियों पर लगातार कार्रवाई