ऑनलाइन बनाए जा रहे नकली जन्म प्रमाण-पत्र
भोपाल। भोपाल नगर निगम में सामने आया एक मामला यह साफ करता है कि फर्जीवाड़े का नया तरीका अब फर्जी वेबसाइट और डिजिटल हस्ताक्षरों के जरिए अपनाया जा रहा है। अगर आपने किसी दलाल के माध्यम से जन्म प्रमाण-पत्र बनवाया है, तो आपको तुरंत उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए। एक महिला द्वारा दिए गए फर्जी सर्टिफिकेट ने पूरे सिस्टम में हडक़ंप मचा दिया है। भोपाल के कोलार क्षेत्र की एक महिला अपने बेटे के जन्म प्रमाण-पत्र में सरनेम में संशोधन के लिए नगर निगम पहुंची थी। जब संबंधित दस्तावेज को निगम के आधिकारिक पोर्टल पर स्कैन किया गया, तो चौंकाने वाला सच सामने आया कि सर्टिफिकेट फर्जी वेबसाइट से बना था। नगर निगम के जन्म-मृत्यु प्रमाण शाखा के रजिस्ट्रार सत्यप्रकाश बडग़ैंया ने बताया कि यह दस्तावेज दिखने में असली जैसा था, लेकिन पोर्टल पर रिकॉर्ड ही नहीं मिला।
जांच में क्या सामने आया?
प्रमाण-पत्र में रजिस्ट्रार के हूबहू डिजिटल हस्ताक्षर मौजूद थे। यह प्रमाण-पत्र किसी फर्जी पोर्टल से बना था, जो सरकारी पोर्टल जैसा दिखता है। हैरानी की बात ये कि इस वेबसाइट पर कोई दस्तावेज नहीं मांगा जाता। मात्र 20 रुपये ऑनलाइन भुगतान करने पर कुछ मिनटों में नकली सर्टिफिकेट मिल रहा है। नगर निगम ने मामले को गंभीर मानते हुए गोविंदपुरा थाना में एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दे दिया है। अधिकारियों को आशंका है कि इस तरह के कई और नकली प्रमाण-पत्र पहले ही जारी किए जा चुके हैं।
आमजन के लिए नगर निगम की चेतावनी
नगर निगम ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे केवल सरकारी वेबसाइट का ही उपयोग करें। किसी भी दलाल या एजेंट से दस्तावेज न बनवाएं। अगर कोई प्रमाण-पत्र संदिग्ध लगे, तो पोस्ट स्कैनिंग जरूर कराएं। नकली सर्टिफिकेट इस्तेमाल करने पर कानूनी कार्रवाई संभव है।

‘सरगुजा छेरी बैंक’ मॉडल से ग्रामीण महिलाओं को मिल रही आर्थिक आज़ादी की नई राह
एक्सटेंशन रिफॉर्म (आत्मा) योजना से गोविंद जायसवाल की बढ़ी आमदनी
टीकमगढ़ के डायल 112 हीरोज: दो एफआरव्ही वाहनों की त्वरित मदद से 12 घायलों को पहुँचाया अस्पताल
सामुदायिक पुलिसिंग से बाल विवाह रोकने में मिलीं मध्यप्रदेश पुलिस को सफलताएं
अनुसूचित जाति बालक प्री-मेट्रिक छात्रावास में शिक्षा, अनुशासन और कैरियर मार्गदर्शन से संवरता भविष्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव का प्रदेश की जनता के नाम संदेश