2 करोड़ की बचत! मेडिकल कॉलेज ने वर्चुअल बॉडी खरीदने से किया इनकार
रायपुर। जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, रायपुर में एनाटॉमी विभाग के लिए 2 करोड़ रुपए की वर्चुअल बॉडी खरीदने का प्रस्ताव रद्द कर दिया गया है। कॉलेज की समिति ने स्पष्ट कहा है कि विभाग में पहले से ही 35 से 40 डेडबॉडी उपलब्ध हैं, इसलिए वर्चुअल बॉडी की कोई आवश्यकता नहीं है। समिति का निर्णय मेडिकल एजुकेशन कमिश्नर कार्यालय को भेज दिया गया है।
क्यों रद्द हुई खरीदी?
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्चुअल बॉडी का उपयोग वहीं होता है, जहां डेडबॉडी की कमी होती है। एनएमसी (नेशनल मेडिकल काउंसिल) के नियमों के अनुसार एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के छात्रों के लिए कैडेवर यानी डेडबॉडी जरूरी है, ताकि वे मानव अंगों को बारीकी से समझ सकें। जबकि वर्चुअल बॉडी केवल थ्री-डी इमेज दिखाती है और छात्रों के लिए उतनी उपयोगी नहीं है।
पर्दे के पीछे की कहानी
29 अगस्त को एक एजेंसी ने कॉलेज में वर्चुअल बॉडी का डेमो दिया था। बताया जा रहा है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों ने इसे खरीदने के लिए दबाव भी बनाया था। कॉलेज ने सहमति दे दी थी, लेकिन जब यह मुद्दा मीडिया में उठा तो समिति ने इसे ‘फिजूलखर्ची’ बताते हुए मंजूरी वापस ले ली।
कमीशनखोरी पर सवाल
जानकारों का कहना है कि वर्चुअल बॉडी की असल कीमत उससे कहीं कम है, जितनी रकम तय की गई थी। इसे खरीदने के पीछे कमीशनखोरी की आशंका भी जताई जा रही है। राजधानी के एक निजी मेडिकल कॉलेज ने भी पहले ही इसे बेकार बताते हुए खरीदने से मना कर दिया था।

तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख ने तृषा को लेकर की विवादित टिप्पणी, विवाद बढ़ने पर मांगी माफी
अनुप्रिया पटेल का बयान: AI डॉक्टरों की जगह नहीं, उन्हें सपोर्ट करने के लिए बना
Rewa में UGC के समर्थन में प्रदर्शन, आपत्तिजनक नारेबाजी का आरोप
MP बोर्ड 10वीं पेपर लीक मामला: शिक्षक ने व्हाट्सएप स्टेटस पर डाला प्रश्नपत्र, मचा हड़कंप
नरेंद्र मोदी से मिले ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबक्र, केरल चुनाव से पहले बढ़ी सियासी हलचल
बुर्का पहनकर कांवड़ लाने का मामला गरमाया, मौलाना का एतराज; महिला बोली-मन्नत पूरी होने पर उठाया कदम
Katni में कार्यपालन यंत्री 20 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार